
अब्दुल बहा कहते हैं:
“अगर बहाई धर्म के दुर्ग की दीवार संविदा की ताक़त से सुरक्षित न रही तो एक दिन ऐसा आएगा जब बहाई धर्म हज़ार वर्गों में विभाजित हो जाऐगा, जैसा की पहले धर्मों में हुआ है. लेकिन इस पवित्र धर्म की निर्मल सुरक्षा के लिए बहाइयों में विभाजन न हो बहाउल्लाह ने अपने उच्च कलम से लोगों से वचन लिया और उस केन्द्र को चुना जो किताब का सम्झानेवाला और विवादों को दूर करनेवाला है. जो कुछ वह लिखे और कहे वही सत्य और बहाउल्लाह कीसुरक्षा में तुरुतियों से सुरख्सित है.
(मुन्ताखाबती अज मकतिब ४/१२५)
“अगर बहाई धर्म के दुर्ग की दीवार संविदा की ताक़त से सुरक्षित न रही तो एक दिन ऐसा आएगा जब बहाई धर्म हज़ार वर्गों में विभाजित हो जाऐगा, जैसा की पहले धर्मों में हुआ है. लेकिन इस पवित्र धर्म की निर्मल सुरक्षा के लिए बहाइयों में विभाजन न हो बहाउल्लाह ने अपने उच्च कलम से लोगों से वचन लिया और उस केन्द्र को चुना जो किताब का सम्झानेवाला और विवादों को दूर करनेवाला है. जो कुछ वह लिखे और कहे वही सत्य और बहाउल्लाह कीसुरक्षा में तुरुतियों से सुरख्सित है.
(मुन्ताखाबती अज मकतिब ४/१२५)