अब्दुल बहा ने किस को विरोधी बताया है और किस को पंथों का बनाने वाला कहा है?अपनी वसिय्यत में उन्हों ने लिखा।
" दैवी धर्म की ठोस दीवार धर्म रक्षक के अनुसरण से बची रहेगी , विश्व न्याय मन्दिर के समस्त सदस्यों , अग्सान , अफ्नान और सभी धरम्भुजाओं, पर अनिवार्य है की वोह
धर्म रक्षक का अनुसरण और नर्मता पूर्वक व्यवहार करें और अधीन रहें । अगर किसी ने इसका विरोध किया तो उसने सत्य का विरोध किया और वोह बही धर्म में विरोध का कारण बना और वोह ईश्वरईय शब्द में विरोध पैदा करने का कारण बनेगा।"
(अब्दुल बहा की वसिय्यत - १२ )